जब अमेरिकन अकेडमी ऑफ़ पीडियाट्रिक्स ने इस बीती जनवरी में स्क्रीन टाइम से जुड़े अपने दिशा-निर्देशों को अपडेट किया, तो शुरुआती बचपन वाले शिक्षकों के बीच बातचीत का रुख बदल गया। यह सिर्फ़ इस बात का सवाल नहीं है कि बच्चे डिवाइस पर कितना समय बिताते हैं, बल्कि यह भी है कि टेक्नोलॉजी के साथ बिताया गया वह समय असल में उनके किस काम आ रहा है।
EdSurge इस सवाल को प्री-किंडरगार्टन और किंडरगार्टन क्लासरूम में ले गया, जहां किंडरगार्टन टीचर, यूनिवर्सिटी इंस्ट्रक्टर और SMART Technologies व Lumio Ambassador डेवोन काल्डवेल ने उन चुनौतियों के बारे में बात की जिनका सामना आज शिक्षक कर रहे हैं।
पूरे लेख में डेवोन का संदेश: मिनट गिनना बंद करें और यह पूछना शुरू करें कि स्क्रीन बच्चे से क्या करने को कह रही है।
"मेरी कभी यह चाह नहीं रही है कि मेरे बच्चे स्क्रीन का इस्तेमाल बिना सोचे-समझे करें। मेरी चाह है कि मैं बच्चों के शरीर को हरकत करते हुए, उनके मुंह को बोलते हुए, और उनके छोटे-छोटे हाथों को कुछ बनाते हुए देखूं।"
यह स्टैंडर्ड इस बात को तय करता है कि वह अपनी क्लास में टेक्नोलॉजी को कैसे शामिल करती है। जब विद्यार्थी स्क्रीन पर लगे हों, तो उन्हें अकेले काम नहीं करना चाहिए। डेवोन ने साथ मिलकर देखने और साथ मिलकर बनाने की सुविधा निर्मित की है, इसमें बच्चों की जोड़ी बनाई जाती है ताकि इस टूल का इस्तेमाल एक सामाजिक काम बन जाए, न कि कोई ऐसा काम जिसमें वे बस चुपचाप देखते रहें।
"वे हमेशा इसका इस्तेमाल किसी पार्टनर के साथ करते हैं। तुरंत ही वे नियम तय करते हैं, एक-दूसरे से बात करते हैं, वे बेहद बहुत ज़रूरी स्किल्स विकसित करते हैं।"
SMART इसी सिद्धांत पर अपने डिज़ाइन बनाता है: ऐसी टेक्नोलॉजी जो बच्चों को सिर्फ़ देखने के बजाय मिलकर काम करने, कुछ बनाने और प्रतिक्रिया देने के लिए प्रेरित करती है। डेवोन अपने रूम में इस्तेमाल होने वाले किसी भी डिजिटल टूल को बहुत ही आसान कसौटी पर परखती हैं। क्या इसे ब्लॉक, प्ले-डो या मार्कर और कागज़ से भी उतनी ही अच्छी तरह किया जा सकता है? "अगर ऐसा हो सकता है, तो आइए इसे वैसे ही करें," वह कहती हैं। उनकी क्लास में टेक्नोलॉजी तभी अपनी जगह बना पाती है, जब वह कुछ ऐसा जोड़े जो प्रैक्टिकल तरीके से सिखाने पर नहीं मिल सकता।
